राजस्थान
Jaipur: जवाहर कला केन्द्र में विजयदान देथा साहित्य उत्सव की शुरुआत
Tara Tandi
22 March 2025 12:07 PM IST

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Jaipur जयपुर । राजस्थानी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए कटिबद्ध राजस्थान सरकार की बजट (2024—25) घोषणा के आलोक में जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय विजयदान देथा साहित्य उत्सव का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कला, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के शासन सचिव श्री रवि जैन ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उत्सव में पहले दिन के सत्र में विजयदान देथा के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला गया, ब्रह्म स्वरूप शब्दों की साधना करने पर जोर दिया गया।
शासन सचिव श्री रवि जैन ने राजस्थानी भाषा को बढ़ावा देने के लिए साहित्य उत्सव के आयोजन के लिए राजस्थान सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्सव में राजस्थान के प्रसिद्ध लेखों को समर्पित सत्र रखे गए है। जिनमें राजस्थानी के लालित्य से सभी सराबोर होंगे। इस आयोजन से युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ेगी और एक से दूसरी पीढ़ी तक भाषा का प्रसार होगा। उद्घाटन सत्र में विजयदान देथा के जीवन परिचय एवं उनके साहित्यकि योगदान से जुड़ी बातों पर प्रकाश डाला गया।
'शब्द ब्रह्म हैं इसकी साधना जरूरी'
साधो! सबद साधना कीजे कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. राजेश कुमार व्यास, श्री राजवीर चलकोई व डॉ. गजादान चारण ने राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति व धरोहर के महत्व पर पर विचार व्यक्त किए। डॉ. राजेश कुमार व्यास ने कहा कि विजयदान देथा ने सच्ची शब्द साधना की और लोक कहानियां को पूर्ण किया। श्री राजवीर चलकोई ने कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में राजस्थानी भाषा को शामिल किया जाना चाहिए और व्यावहारिक तरीके से इसे सिखाया जाना चाहिए। श्री गजादान चारण ने कहा कि राजस्थानी भाषा को बचाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सामाजिक चेतना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने युवाओं को राजस्थानी साहित्य, संस्कृति और इतिहास को पढ़ने पर जोर दिया।
'ढाई कड़ी की रामलीला' में हुआ 'सीता-हरण' प्रसंग का मंचन
रंगायन सभागार में राजस्थान की अनूठी नाट्य विधा में 'ढाई कड़ी की रामलीला' का मंचन हुआ। विश्वामित्र दाधीच के निर्देशन में हुई इस विशेष प्रस्तुति में 'सीता हरण प्रसंग' को मंचित किया गया। कलाकारों ने अपने संवादों को गाकर दर्शकों तक पहुँचाया, जिसमें महिला और पुरुष पात्रों के संवाद अलग-अलग लय और शैली में प्रस्तुत किए गए। 'ढाई कड़ी की रामलीला' राजस्थान की एक दुर्लभ नाट्य परंपरा है, जिसमें अभिनय और संगीत का गहरा तालमेल देखने को मिलता है।
उत्सव के दूसरे दिन प्रातः 9:00 बजे प्रातः कालीन संगीत सभा, प्रातः 10:00 बजे रानी लक्ष्मी कुमारी चुंडावत सत्र में राजस्थानी भासा मांय महिला लेखन री कूंत, प्रातः 11:45 बजे सीताराम लालस सत्र में भासा री रमझोळ-कुण सी राजस्थानी, दोपहर 2:00 बजे किशोर कल्पनाकांत सत्र में टाबरां सारूं लेखन, दोपहर 3:00 बजे चतर सिंह बावजी सत्र में लोक वार्ता और सायं 6:30 बजे कवि सम्मेलन का आयोजन होगा।
इस अवसर पर केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक श्रीमती अलका मीणा, वरिष्ठ लेखाधिकारी बिंदु भोभरिया और वरिष्ठ साहित्यकार व बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
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